Hindi Poems, Lover's Poems

Khali Frame

कविता – ख़ाली फ्रेम ये फ्रेम ख़ाली ही रह गई जिसमें लगनी थी तस्वीर तेरी-मेरी ! दिल चीर देती है अब, ख़ाली फ्रेम दिखते ही खो जाता हूँ स्मृतियों में, उभर जाते हैं असंख्य चित्र, मानचित्रों की तरह पर इन सभी में तेरा पता मिलता नहीं ! ये मात्र कविता नहीं, सच्चाई है मैंने ख़ाली फ्रेम बहुत छुपाई है, अब मैं चाहता नहीं ये मुझे दिखे, क्योंकि इसका ख़ालीपन मन से उतरता नहीं ! ये तो पता है, रहेगी ये ख़ाली ही, और कोई तस्वीर इस पर चढ़ेगी नहीं, क्योंकि ये थी तेरी-मेरी, मैं इसको तोड़ता भी नहीं, क्योंकि ये है कुछ मेरी तरह ही, तस्वीर दिखती नहीं ….. पर नज़रों से हटती नहीं !! – ‘नीब’ 31-07-2016

Hindi Poems

Naye Prtibimb

कविता – नए प्रतिबिम्ब खो गए है वक़्त के आईने से, जो सपनें संजोए थे मैंने, समेटने की, कि थी कोशिश बहुत, पर बिखर गए सैलाब बन कर। धुमिल होते आईने पर, उभर रहे हैं, प्रतिबिम्ब नए नए ! मिलते नहीं वो निशाँ साफ़ करने पर भी, छिप गए है धूल में करवट बदल कहीं …… रह जाते है बस आईने युहीं। खो जाते है शक्श और सपने, वक़्त की परछाई में कहीं। – ‘नीब’ 28-11-2015

Hindi Poems

Gum tere or mere

गम तेरे और मेरे वह आये हैं, बन नदियां गहराईओं में ! बिलखती है, और सोती है, भूखी वो गरीब की बेटी ! नशे मन लौट आया है, भीतर दिन का डरा सहमा, प्रताड़ित है पत्नी, और सहमी है बेटी ! अब थम रहा है, आक्रोश और, आंख्ने ढूढ़ रही है रोटी ! – नीब

Hindi Poems, Social Poems

Baat kahi or le gaya !

कविता – बात कहीं और ले गया बदली थी सरकार हमने क्या जोश था आख़िर बदलाव आया था, मन में एक भाव आया था की अब देश बदलेगा ! नहीं मरेगा किसान, नहीं होगा सीमा पर  बलिदान ! कला धन आएगा और गरीब भी खुशहाल हो जायेगा, भ्रष्टाचार खत्म हो जायेगा, वर्दीवाला भी प्यार से बतयायेगा ! आम जनता की भी इज्जत होगी, लाचार नहीं दबाया जायेगा । एक उज्जवल भारत के, सपने देख लिए थे, एक जनून था, की अब तो बदलाव जरूर आएगा, दिन गुजर रहे है …… और जनून एक वोट है ! जो अगले चुनाव में फिर जगा दिया जायेगा ! नहीं जगा तो, भड़का दिया जायेगा ! शायद……. मैं बात कहीं, और ले गया !!!! -‘नीब’ 20-08-2015

Hindi Poems, Motivational Poems, Social Poems

Ek Kranti To Lani Hogi

कविता – एक क्रांति तो लानी होगी क्रांति तो लानी होगी, परिवर्तन की ललक, तुझे खुद में जगानी होगी ! दल बदल कर देख लिए हमने, घिसे – पीटे वादों से, बस जनता मुर्ख बनानी है सरकार तो इन्होंने भी, वैसे ही चलानी  है ! ख्यालों के पुलिन्दों से, वैभव महल बनाया है, भ्रष्टाचार बढ़ा ही है, कहाँ इन्होंने कम कराया है ? काला  धन – काला  धन, जाप करवाया था, क्या पांच रूपया भी वापिस आया है? स्कैमों की लिस्ट में, इन्होंने भी अपना नाम दर्ज़ कराया है ! इन्होंने कौन सा भ्रष्टों को, बाहर का रास्ता दिखाया है ? किसान आज भी तड़फ रहा है, वीरों ने सरहद पर फिर से, देश की आन में सिर कटवाया है ! ये कौन सा रुक पाया है ? आज भी हज़ार बच्चा भूखा सोया है, किसी अबला का दामन छल्ली होया है, वर्दी वालों का भी, कहाँ ख़ौफ़ कम हो…

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Kavita

बापू या बाबा न बन जाऊं? सुना डालूं कुछ बातें – बन जाये प्रवचन ! मिल जायेंगे मुझे चेले चौपाठे, बैठे बैठे …. ! कुछ ज्यादा भी नहीं करना जतन बस पढ़ना है लोगों का मन, खुद व् खुद आएगा धन!! बनानी है एक विचारधारा वहा देनी है धर्म की धरा! डेरा भी होगा अपना फेरा भी होगा अपना, प्रेमियों का घेरा भी होगा! खूब चलेगा नाम बहुत सारे होगें काम, हमेशा चलेगी धाम! कितना महान है ये काम पक्का, गारंटी का है ईनाम, यहाँ कभी नहीं गिरता दाम ! बिन मांगे ही ढेर लग जाता हर शाम !! बाबा बाबा लोग बोलेगें होगी जय जय कर, हाथ लगा के दिखा दे कोई, होगी मारो मार ! ——————————————– बलवंत सिंह ‘नीब’ -25/07/2015 — अब इसी नाम से लिखूँगा, व्यंग्य पसंद आये तो शेयर करना, अन्यथा डिलीट कर देना, व्यर्थ में नफरत नहीं फैलानी, बस इतनी कर गुजारिश है , धन्यबाद…

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Bachpan Ka Khel Yaad Aya Mujhe

कविता  – बचपन का खेल याद आया मुझे  ———– अटक गया था आकर अम्बर से सटकर छपर पर, वो गेंद बच्चों का जिन्होंने खेला था क्रिकेट दिनभर ! चूर था वो जोश थककर कौन जाये अब छत पर बंद हो गया तत्पर , जो खेल चल रहा था पथ पर, खोया था मैं भी खेल में उनके अब तक, क्योंकि….. खेला था मैं भी उसी पथ पर !!! बलवंत सिंह ‘नीब’ -23/07/2015

Hindi Poems

nai kavita

नई कविता  ———– कट गई थी गेहूं जमने लगा था खेल  बन गया था मैदान, गेहूं का खेत ! और गुली डंडे का खेल, बस खेल से ही, तो हो जाता था मेल ! बचपन में खूब चलती थी, अपनी भी रेल ! बलवंत सिंह  ‘नीब’ – 23/07/2015

Hindi Poems

Usne kaha Tha

कविता – उसने कहा था मैं तुम्हारे बिना जी नहीं पाऊँगी, पर, क्या सच कहा था? शायद, उस वक्त सच था.। पर, दूसरे ही पहर छोड़ गई, और, जी भी रही थी, जी भी रही है। …. ! हवा का झोंका आया और मिट्टी हो गया, उजड़ गया, ख्वाबों का महल, छोड़ गया तन्हा, और रह गया यादों का प्रतिबिम्ब, जो कल तक था दिल अज़ीज, वह गया पानी की तरह.……………! उसने कहा था.…… बलवंत सिंह ‘नीब’ -31/07/2015

Hindi Poems, Lover's Poems

Aana jaroor

कविता – आना जरूर क्या रूह क्या तन ब्लॉक है मेरा मन, वो कर गए हर जतन, बदल गया है नंबर क्या फेसबुक , क्या व्हाट्सएप्प ट्विटर, सब है बंद, कौन बॉयफ्रेंड, कैसी गर्लफ्रेंड, अब सब है बंद। मैं साथ जगता हूँ, सोता हूँ संग, चाहे हो गया हूँ बदरंग, होश चाहे खो लिए बोझ तले दब लिए, पर वो दर्द न हो पाया है कम, तू सुन ले सनम, रूह से हो रहे है कम, पर अभी भी दिल में, हम ही है हम। राह तेरी ताकती है, वो आँखे खुली और बेचैन, बसे है जिनमें तेरे ही नैन। मौसम बदल गया, बहारें नईं है लोग भूल गए, जमाना रुठ गया, न खत्म हुआ इंतज़ार, न खत्म होगा प्यार, अब तो तुझे, आना ही होगा, बहुत करवा लिया ऐतवार, न तू जा, उस पार, न तू हार, इस बार। बलवंत सिंह – 11-07-2015

Ghazal & Songs, Sad Poetry

song

वो जाने वफ़ा तू, तू याद न आ, तू याद न आ, मर गया जिसपे उसको, भूल भी जा, क्या सिला मिला, मुझको, ये बता दे तू, जरा सा ही कसर था मेरा, जो मिला गम है तेरा, तू बता मुझको, और याद न आ, तू याद न आ, बेवफा तू सुन ले जरा, इतना कहर न, बरपा, तू दूर न जा, जाना है तो, मार के जा, तू जरा मुझको, मार तो जा, तू याद न आ, तू याद न आ। ………….. बलवंत सिंह 18-05-2015

Hindi Poems, Motivational Poems

khul ke jeo yaro

कविता – खुल के जीओ यारो कितनी बंदिशे लगा रखी है जिंदगी उलझनों फसा रखी है। घुटन तो सबको है, पर कोई परम्परा की दुहाई देता है कोई रब के डर की गवाही देता है, तो किसी को घमण्ड भी है अपने रुतबे का, कितनी बंदिशे लगा रखी है भाई, जिंदगी उलझनों फसा रखी है। जब तुम थे, तुम्हारी ना कोई जात थी, ना कोई धर्म था, ना ही था, कोई रूतबा ! जाती बारी भी ये साथ नहीं जाना, सब इतिहास बन जाना, उसी का अगली पीढ़ी ने अनुशरण कर जाना, कुछ नहीं बदलना, जिंदगी ने वैसे ही घुटते जाना। समझौते पे समझौते करते है, कर्मकांडों में उलझे रहते है, क्योंकि हम खुद से ही, डरे – डरे से रहते है। अरे यार तू जी ले जरा, कुछ अपनी तरह, तेरा ही है आसमां, तेरी ही है धरा ! क्यों रहता है, तू डरा -डरा ! नहीं चाहिए तुझे…